रोबोटिक हाथ करेगा सुनने में अक्षम लोगों से बात, बेल्जियम में तकनीक विकसित
वैज्ञानिकों ने रोबोटिक हाथ बनाया है, जो सुनने में अक्षम लोगों के लिए लिखित और बोले गए शब्दों को साइन लैंग्वेज यानी सांकेतिक भाषा में बदल देगा। इस तरह जो लोग सांकेतिक भाषा को नहीं समझते हैं वे भी आसानी से इस भाषा में बात कर सकेंगे। थ्रीडी प्रिंटर से बने इस रोबोटिक हाथ की कीमत 40 हजार रुपये होगी। दावा है कि दुनिया के सात करोड़ सुनने में अक्षम लोगों के लिए यह तकनीक वरदान बन सकती है।
बेल्जियम की एंटवर्प यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित की तकनीक
बेल्जियम की एंटवर्प यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की ओर से विकसित इस रोबोट को प्रोजेक्ट स्लेन का नाम दिया गया है। अभी वैज्ञानिकों ने एक हाथ बनाया है, जल्द दो हाथ विकसित किए जाएंगे ताकि जटिल सांकेतिक भाषा को आसानी से व्यक्त किया जा सके। दावा है पांच साल के भीतर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। इस तकनीक से सुनने में अक्षम लोगों को भी सांकेतिक भाषा सिखाना आसान हो जाएगा। प्रोजेक्ट प्रमुख इरविन स्मेट के मुताबिक यह तकनीक सुनने में अक्षम लोगों की दुनिया बदल देगी।
यूं काम करेगी तकनीक
रोबोटिक हाथ को कंप्यूटर से जोड़ना होगा। इसके बाद यूजर को लोकल नेटवर्क के जरिये लिखित या मौखिक संदेश देना होगा। इन शब्दों के अक्षरों को यह रोबोटिक हाथ फिंगर स्पेलिंग के जरिये सांकेतिक भाषा में बदल देगा। हर अक्षर के लिए अलग संकेत होगा।
बेल्जियम की एंटवर्प यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित की तकनीक
बेल्जियम की एंटवर्प यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की ओर से विकसित इस रोबोट को प्रोजेक्ट स्लेन का नाम दिया गया है। अभी वैज्ञानिकों ने एक हाथ बनाया है, जल्द दो हाथ विकसित किए जाएंगे ताकि जटिल सांकेतिक भाषा को आसानी से व्यक्त किया जा सके। दावा है पांच साल के भीतर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। इस तकनीक से सुनने में अक्षम लोगों को भी सांकेतिक भाषा सिखाना आसान हो जाएगा। प्रोजेक्ट प्रमुख इरविन स्मेट के मुताबिक यह तकनीक सुनने में अक्षम लोगों की दुनिया बदल देगी।
यूं काम करेगी तकनीक
रोबोटिक हाथ को कंप्यूटर से जोड़ना होगा। इसके बाद यूजर को लोकल नेटवर्क के जरिये लिखित या मौखिक संदेश देना होगा। इन शब्दों के अक्षरों को यह रोबोटिक हाथ फिंगर स्पेलिंग के जरिये सांकेतिक भाषा में बदल देगा। हर अक्षर के लिए अलग संकेत होगा।

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